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Bapu Bazaar


२५ दिसम्बर २०११

चौरी बेलहा महाविद्यालय तरवा आज़मगढ़ में लगा आठवां बापू बाजार

बापू बाजार की शुरुआत नेक पहल-डॉ. राकेश सिंह


आजमगढ़: वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर के कुलपति प्रो सुन्दरलाल प्रारंभ किये गए गरीबों के बाजार बापू बाजार  का आयोजन चौरी बेलहा महाविद्यालय तरवा आज़मगढ़ में २५ दिसम्बर को किया गया.इस आठवें  बापू बाजार में  लोगों ने जमकर खरीदारी की देखते देखते बिक्री स्टाल खाली हो गए.बापू बाजार में इतनी भीड़ रही जिसका अंदाजा पहले से नहीं लगाया गया था.राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों ने बाजार में खरीद करने वालों को मनचाही वस्तुएं उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास किया.लोगों को २-१० रुपयें में ऐसी वस्तुएं मिली जिसका उनको कभी विश्वास नहीं था.बच्चे को बाजार में मुफ्त में खिलौने और किताबे दी गई.

विश्वविद्यालय से संबद्ध आज़मगढ़ जनपद के 35 महाविद्यालयों ने बापू बाजार में प्रतिभाग कर अनेक स्टाल लगाये गये.इन स्टालों पर दुकानदार राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवक बने हुए थे . इन पर वस्त्र, कंबल, ऊनी शाल, खिलौना, चप्पल, जूता, गृहपयोगी सामान, कापी-किताब रखे गये थे. कार्यक्रम का शुभारंभ  विशेष कार्याधिकारी एनएसएस सत्येंद्र बहादुर सिंह एवं मुख्य अतिथि  गणेश राय पीजी कालेज डोभी जौनपुर के प्राचार्य डॉ. राकेश सिंह ने किया.विशेष कार्याधिकारी एनएसएस सत्येंद्र बहादुर सिंह ने सभी स्टालों पर उपलब्ध सामानों के बारे में जानकारी ली.


मुख्य अतिथि डॉ. राकेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्ववविद्यालय के कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने बापू बाजार की शुरुआत कर बहुत ही नेक पहल की हैं.इस बाजार से जहा समाज का भला हो रहा हैं वही बापू के पदचिन्हों पर छात्र छात्राओं को चलने का मौका मिल रहा है. विशेष कार्याधिकारी एनएसएस सत्येंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि आज हमें जीवन में व्यावहारिक पहलुओं को समझने की  जरुरत हैं.आज इस बाजार के माध्यम से समाज के उनलोगों की सेवा हो रही हैं जिनके पास बहुत कुछ नहीं हैं. श्री सिंह ने नेत्र दान, मत दान और वस्त्र दान करने की अपील की. एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हितेंद्र सिंह ने बापू बाजार के उदेश्यों को बताया.अध्यक्षता करते हुए  डॉ. विश्वनाथ सिंह ने कहा कि इस बाजार के माध्यम से बापू को सच्ची श्रधांजलि    दी गई हैं. बापू में कार्य सौदय था सत्या अहिंसा पर चलने का माद्दा था.वर्तमान समय में समाज से ईमानदारी ,अहिंसा और प्रेम का लोप हो रहा हैं.प्राचार्य सतीश सिंह ने बाजार में आये लोगों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय की  प्रगति से अवगत कराया.

प्रबंधक स्वतंत्रता सेनानी चंद्रदीप सिंह के पुत्र सुरेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा दैनिक जागरण के जिला प्रभारी हरिशरण पंत तथा डॉ. विश्वनाथ सिंह को शाल भेंट कर सम्मानित किया. प्रभाकर सिंह ने आभार प्रकट किया व संचालन डॉ. संतोष कुमार सिंह ने किया.बीएड की छात्रा जया पांडेय, अंजली शुक्ला आदि ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया. हरिहरपुर घराने के शंभूनाथ मिश्र ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया.इस अवसर पर धर्मवीर यादव, डॉ. सौम्य सेन गुप्ता, डॉ. रमन सिंह, दिग्विजय सिंह राठौर, राणा सिंह, प्राचार्य सतीश सिंह, डॉ. सहजानंद पांडेय, शिवनारायण चौहान, चंद्रहंस सिंह, राजेंद्र मिश्र,डॉ. बृजेश कुमार यदुवंशी,  डॉ. नंदलाल दुबे, संजय सिंह  आदि उपस्थित थे.

रिपोर्ट एवं फोटो- दिग्विजय सिंह राठौर, प्राध्यापक जनसंचार विभाग

27 November, 2011  

बापू बाज़ार के माध्यम से विद्यार्थी समाज की वस्तुस्थिति को समझ रहे हैं:प्रो सुन्दर लाल

-डीसीएसके स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊ लगा सातवां बापू बाजार

मऊ. बापू बाज़ार के माध्यम से विद्यार्थियों का अलग तरीके से विकास को रहा हैं जो कक्षा में नहीं हो सकता.इस माध्यम से वह समाज की वस्तुस्थिति को समझ पा रहे हैं.इसके साथ ही उनके व्यक्तिव में विकृतियाँ उत्पन्न नहीं होंगी जो हमें समाज में आज दिखाती हैं. यह विचार डीसीएसके स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊ में २७ नवम्बर को लगे सातवें बापू बाज़ार में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय या महाविद्यालय का काम बस इतना नहीं होना चाहिए कि परीक्षा ले और डिग्री देकर छात्रों को समाज में ढ़केल दी.आज महाविद्यालय व समाज के बीच की दुरी को पटाने का समय हैं.आज जो लोग इस परिसर में लगे बापू बाज़ार में खरीददारी करने आये हैं वो कभी सोच भी नहीं सकते थे कि इस महाविद्यालय में आयेगे उनके बेंच,कुर्सिया और दीवारों को स्पर्श करेगे

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उन्होंने आगे कहाकि आज समाज में एक तरफ बहुत सारे ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास ढेर सारी सामग्रियां अनुपयोगी पड़ी हैं। वहीं दूसरी तरफ बहुत सारे ऐसे लोग भी हैं जिनका जीवन उन वस्तुओं के अभाव में चल पाना कठिन है। इसी बिंदु को ध्यान में रख करके उन सामग्रियों को एकत्रित कर गरीबों को उपलब्ध कराने का निश्चय किया है। उनका प्रतीकात्मक मूल्य इसलिए रखा गया है ताकि गरीबों का मान सम्मान किसी प्रकार से आहत न हो और उनकी सहायता भी हो जाये.यहाँ से सामानों को खरीदने वाले गर्व से कह सकते हैं कि वो भीख मांग के नहीं लाये हैं बल्कि खरीदकर लाये हैं. मानव और प्रकृति के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि रोटी, कपड़ा और मकान तीनों की पूर्ति हमें प्रकृति से होती हैं.गाँधी जी ने कहा था प्रकृति से अपनी आवश्यकता भर ले और उसका तब तक प्रयोग करे जब तक उसका उपयोग हो सकता हैं.प्राकृतिक संसाधनों का पूरा प्रयोग हो इसलिए इस बाज़ार में इस्तेमालशुदा सामानों को लाया गया हैं.बापू बाजार के माध्यम से प्रकृति का सम्मान किया जा रहा .

नए ज़माने के माहौल पर उन्होंने कहा कि बहुत दुखद हैं कहाँ - कहाँ बम हैं हमें नहीं पता हैं असुरक्षा का भाव सबके मन में रहता हैं. बापू ने अहिंसा का शस्त्र दिया था. बापू की ये सोच हमारे बच्चों के विचार- व्यवहार में आये ये जरुरी हैं. शिक्षक संघ के डा. देवेंद्रनाथ सिंह ने कहा कि यह बाजार आज भी बापू की प्रासंगिकता को प्रमाणित करता हैं.इसके माध्यम से दरिद्रनारायण की सही मायने में सेवा हो रही हैं.प्राचार्य डा. शिवशंकर सिंह ने कहाकि बापू मेले का आयोजन गांधी दर्शन एवं सिद्घांत को साकार करने का एक उपक्रम है।प्रबंध समिति के सचिव गौरी शंकर खंडेलवाल ने कहा कि हम हर गरीब को तो इस बाजार के माध्यम से वस्तुएं तो मुहैया नहीं करा सकते लेकिन जो सन्देश इसमें हैं वो लोगों की सोच बदलने में बहुत कारगर हैं.

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एन एस एस समन्यवयक हितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अब तक बापू बाज़ार ने २५००० गरीबों को सामान उपलब्ध हो चूका हैं.यह पुनीत कार्य बिना एन एस एस की टीम के संभव नहीं हो पाता.कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के बाद डा. कमलेश राय ने गीत प्रस्तुत किया। इस बापू बाजार में मऊ के महाविद्यालयों की तरफ से स्टाल लगाए गए। इस अवसर पर मुख्य रूप से आरपी यादव, शतानंद, डॉ केडी पाठक, शर्वेश पांडेय, डा. महेंद्र सिंह, डा. विनोद कुमार, डा. सुरेश प्रताप दीक्षित, डा. संतोष सिंह,डॉ ब्रजेश यदुवंशी,दिग्विजय सिंह राठौर आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट एवं फोटो- दिग्विजय सिंह राठौर, प्राध्यापक जनसंचार विभाग

दिनांक: ३० अक्टूबर, २०११

चौधरी चरण सिंह किसान महाविद्यालय जखनिया गाजीपुर में लगा बापू बाज़ार

बापू बाज़ार महायज्ञ है: प्रो के एम त्रिपाठी

बापू के आदर्शों की आज समाज को जरूरत:प्रो सुन्दर लाल

जो देखा उसने मुझे भाव विभोर कर दिया है. यह बापू बाज़ार महायज्ञ है इसमें हम सभी  मिल कर आहुति दे. यह बीज जो बोया गया हैं उसे मिलकर बड़ा करे.उक्त बातें पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा जखनिया गाजीपुर के चौधरी चरण सिंह किसान महाविद्यालय में ३०अक्टूबर को आयोजित बापू बाजार में बतौर मुख्य अतिथि गलगोटिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के एम त्रिपाठी ने कहीं. उन्होंने कहा कि समय किसी का इंतजार नहीं करता. बापू बाज़ार में जो उत्साह दिख रहा हैं वो समय के साथ कभी कम नहीं होना चाहिए.बापू बाज़ार के माध्यम से पढ़ने वाले बच्चे जिस तरीके से समाज से सीधे जुड़ रहे हैं आज के समय में यह बहुत ख़ुशी की बात हैं.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने कहा कि बापू के विचारो को अपने व्यक्तित्व में ढाले. बापू के आदर्शों की आज समाज को जरूरत हैं. बापू ने दरिद्रनारायण की बात की थी . हमें भी अपना काम करते समय इनका  ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें समाज के साथ जुड़ना होगा. जिनकी हम सहायता करे उनका भी सम्मान करना चाहिए.


राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य संपर्क अधिकारी डॉ सत्येन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि एनएसएस से जुड़ने किए बाद यह हमारा कर्तव्य बनता हैं कि हम खुद भी जागरूक बने और दूसरों को भी जागरूक करे.

श्री सिंह ने बहुत मार्मिक ढंग से नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों से अपील की.चौधरी चरण सिंह किसान महाविद्यालय जखनिया गाजीपुर के प्रबंधक हरिनारायण यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा बापू बाज़ार लगाने का मुझे जो सौभाग्य प्राप्त हुआ हैं वह मेरे लिए गर्व की बात है.राष्ट्रीय सेवा योजना के डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आज बापू बाज़ार में जिन लोगों ने तनिक भी अपना योगदान दिया हैं उन्हें गरीबों की दुआएं मिलेगी. उन्होंने कहा कि बापू बाज़ार अब तक हजारों गरीबों को आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करा चुका हैं.

बापू बाजार में ५० महाविद्यालयों  के  राष्ट्रीय सेवा योजना कैडेटों द्वारा जुटाये गए सामानों को २-१० रुपए के प्रतीकात्मक मूल्य पर दिया गया. अपने मनपसंद के कपड़ो को लेने के लिए बूढ़े, बच्चे, महिलाएं एवं अन्य काफी उत्साहित दिखे. बच्चों को मुफ्त में खिलौने,कापी व किताब दिए गए.कोई बच्चा गुडिया पाकर खुश था तो कोई खिलौना में कार.बाजार से वापस जाते समय उनके चेहरे पर मुस्कान इसे बया कर रही थी.दही का भी स्वाद लोगों ने मुफ्त में लिया.

रिपोर्ट- दिग्विजय सिंह राठौर,प्राध्यापक जनसंचार विभाग.

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आज़मगढ़ में लगा चौथा बापू बाज़ार

गरीबों का विकास करना हम सभी का नैतिक कर्त्तव्य: प्रो सुन्दर लाल

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण गरीबों के लिए  लगाये जाने वाला बापू बाज़ार २८ अगस्त  को आज़मगढ़ जनपद के गंगा गौरी महाविद्यालय रामपुर में लगा.इस बापू बाज़ार में एन एस एस की ४५ इकाइयों के छात्र- छात्राओं ने बाज़ार के लिए सामान जुटाए थे.बापू बाज़ार महात्मा गाँधी की सोच को लेकर विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण इलाकों  में लगाया जाता हैं. इस बाज़ार की खासियत यह हैं कि इसमें बिकने वाले सामानों को समाज के संभ्रात लोगों से मांग कर जुटाया जाता हैं और गरीबों को मुफ्त देने के बजाये प्रतीकात्मक मूल्य २ से १० रुपए रख कर उन्हें बेच दिया जाता हैं.जिससे उनकी  सहायता भी हो जाये और उनका आत्मसमान भी बना रहे.बापू बाज़ार का शुभारम्भ फीता काटकर  पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने किया.बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ ही साथ समाज के बारे में भी सोचना चाहियें. हमारे समाज में गरीब अमीर सभी तरह के लोग रहते हैं. पूरा समाज तभी सुखी रह सकता हैं जब सबकी जरूरतें पूरी हो.गरीबों का विकास करना हम सभी का नैतिक कर्त्तव्य बनता हैं. उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी की सोच थी कि हर उस वस्तु का तब तक प्रयोग करना चाहिए जब तक वह उपयोगी है.इसी सोच को लेकर बापू बाज़ार लगा हैं.अध्यक्षीय  संबोधन में  प्रदेश  के उच्च शिक्षा सचिव अवनीश अवस्थी ने कहा कि समाज के बारे में किसी विश्वविद्यालय द्वारा इस तरीके की सोच रख कर बाज़ार लगाना अद्भुत हैं.उन्होंने छात्र- छात्राओं से अपील की कि नक़ल की जगह अकल का प्रयोग करें तभी  सफल होंगे.  एन एस एस के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ एस बी सिंह ने कहा कि बापू बाज़ार के लिए स्वयं सेवकों ने जो लगन दिखाई हैं वह निश्चित रूप से समाज के लिए उपयोगी होगा.एन एस एस के समन्यवक डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह के बापू बाज़ार के उदेश्यों को बताया.इस बाज़ार में कपड़े,जूते,टोपी आदि दैनिक उपयोग की वस्तुएं बिकी. बाज़ार में सामान खरीदने के लिए मारा मारी मची रही.बापू बाज़ार से प्राप्त आय को बापू स्वाभिमान कोष में जमा किया जायेगा.इस बाज़ार में गरीबों को दूध और दही भी खिलाया गया .
भोजपुरी लोक गायीका मालिनी अवस्थी ने अपने गीतों से समां बांध दी.सुर संग्राम के मोहन राठौर, राकेश तिवारी के साथ अन्य कलाकारों ने भी गीत प्रस्तुत किये.कॉलेज के प्रबंधक शैलेन्द्र सिंह एवं गजेन्द्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया.विभिन्न गतिविधियों में मुख्य रूप से राम सिरोमणि यादव, एस एन पाल,हरी सरन पन्त,सुभाष चन्द्र सिंह, डॉ ब्रजेश यदुवंशी,दिग्विजय सिंह राठौर,कुबेर मिश्र,संजय सिंह,शंकर यादव आदि लोग मौजूद रहे.

दिनांक: २८.०८.२०११

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रिपोर्ट - दिग्विजय सिंह राठौर

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मुहम्मदाबाद मऊ में लगा तीसरा बापू बाज़ार

मऊ.वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के कुलपति प्रो सुन्दरलाल द्वारा प्रारंभ की गयी बापू बाज़ार श्रृंखला के अंतर्गत रविवार को पब्लिक महिला महाविद्यालय मुहम्मदाबाद मऊ में तीसरा बापू बाज़ार लगा.इस बाज़ार में बड़ी संख्या में गरीबों ने कपड़ों की खरीददारी की. गरीबों के लिए लगने वाला यह अनोखा बाज़ार हैं.  इस बाज़ार कि शुरुआत जौनपुर से हुई थी. इसमें बिकने वाले सामानों को राष्ट्रीय सेवा योजना के कैडेटों द्वारा समाज के लोगों से मांग कर जुटाया जाता हैं.गरीबों का आत्म सम्मान भी बना रहे और कपडे भी मिल जाये इसलिए इनका प्रतीकात्मक मूल्य रख कर बापू बाज़ार में बेचा जाता हैं. 33  राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाइयों के सहयोग से लगायें गएँ इस बाज़ार में बिकने वाले कपड़ो की कीमत २ से १० रुपये रही. खास बात ये थी कि सिर्फ वो लोग इसमें खरीददार थे जो पहले से राष्ट्रीय सेवा योजना के कैडेटों द्वारा चिन्हित किये गए थे.बाज़ार में जुटे हजारों लोगों ले खूब खरीदारी की.

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इसमें साड़ी,पैंट,सलवार ,कमीज, आदि हर उम्र के लोगों के लिए कपडे , बर्तन थे.बाज़ार में मुफ्त में किताबें और खिलौनों को भी दिया गया.बापू का चरखा भी इस बाज़ार में देखने को मिला. बापू बाज़ार का शुभारम्भ कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने किया . उन्होंने कहा कि बापू बाज़ार के लिए जो बच्चों ने सामानों को घर -घर जा के जुटाया हैं ये बहुत ही पुण्य का काम हैं .जिसका फल भविष्य में निश्चित रूप से उनको मिलेगा. बापू का सपना था की समाज का हर वर्ग कंधे से कन्धा मिला चले. जो गरीब हैं उनके उत्थान के लिए भी हमें आगे आना चाहिए.बापू बाज़ार बस एक बाज़ार नहीं हैं ये एक विचार हैं जिसके कारण हमारे मन में समाज के निर्बल लोगों के प्रति प्रेम और सम्मान आता हैं.

उन्होंने कहा कि हमें जीवन में वस्तुओं का मूल्य समझना चाहिए . बहुत सारी वस्तुएं जो हमारे लिए उपयोगी नहीं होती हैं. वो दुसरे के लिए बहुमूल्य हो सकती हैं .इसलिए ये हमारी नैतिक रूप से जिम्मेदारी होती हैं कि हम इन वस्तुयों को जरूरतमंदों तक पहुचाएं. बापू बाज़ार के माध्यम से हम इसी काम . शिबली कॉलेज आज़मगढ़ के प्रबंधक मिर्ज़ा महाफुजुर्रहमान बेग ने कहा कि बाजारें तो बहुत सारी लगती हैं लेकिन बापू के आदर्शों को लेकर गरीबों के लिए किसी विश्वविद्यालय द्वारा इस तरह के बाज़ार लगाना अद्भुत हैं. बापू के विचारों को दुसरे देश के लोग अपना रहे हैं और हम भूलते जा रहे हैं.यह चिंता का विषय हैं.

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राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह इस बाज़ार के कांसेप्ट को पुरे देश में सराहना की जा रही हैं आने वाले समय में इसको तहसीलों पर लगवाया जायगा.आज समाज के कई लोग स्वयं बापू बाज़ार के लिए कपड़ो को दे रहें हैं . यह बहुत सुखद हैं. छात्रों के मन में गरीबों के प्रति जो भाव पैदा हो रहे हैं वह जीवनपर्यत उनके साथ रहेंगे और एक नेक इन्सान बनाने में मदद करेगें. विधायक राजेंद्र कुमार ने कहा कि आज इन बच्चों को बापू बाज़ार के द्वारा समाज को समझने का मौका मिला हैं .इसके साथ ही गरीबों की सहायता भी हुई हैं. इस अवसर पर डॉ आर एस यादव, संत लाल पाल, डॉ ब्रिजेश यदुवंशी, दिग्विजय सिंह राठौर,बाके सिंह, रामानंद यादव,मूल चंद,मुरलीधर यादव समेत कई कॉलेज के प्रबंधक , प्राचार्य एवं छात्रा छात्राएं मौजूद रहे.

रिपोर्ट: दिग्विजय सिंह राठौर, जनसंचार विभाग

३० जनवरी २०११

पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने गरीबों के लिए लगाया पहला बापू बाजार

वह गर्व से कहेगा कि मैंने इसे बापू बाजार से ख़रीदा हैं : प्रो. सुन्दर लाल

30 जनवरी को  बापू के शहीद दिवस के रूप में हम सब जानते हैं .महात्मा गाँधी सदैव दरिद्रनारायण के उत्थान की बात किया करते थे. पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने भी इसी सोच को लेकर आज समाज के गरीबों की सम्मान सहित सहायता करने का काम शुरू किया हैं.कुलपति प्रो सुन्दर लाल की सोच को आज बापू बाजार में परिणित होते देखा गया और  विश्वविद्यालय ने सामाजिक सरोकारों के लिए एक नया इतिहास रचा है.बापू बाजार एक आम बाजार नहीं हैं, यह बाजार उनके लिए हैं जो बड़े- बड़े बाजारों में कही ग़ुम हो जाते हैं. समाज के गरीबों को पूर्ण समर्पित हैं ये बापू  बाजार.


विश्वविद्यालय से करीब स्थित जनता जनार्दन इंटर कॉलेज जासोपुर  में लगे पहले बापू बाजार का उद्घाटन कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने किया.उन्होंने कहा कि आज बाजार में माल संस्कृति पनप रही हैं.हमारे समाज में जहा एक तरफ गरीब लोग हैं तो दूसरी तरफ हर चीज़ को खरीदने वाले अमीर लोग.देखा गया हैं कि प्रयोग में न आने वाली वस्तुओं को लोग दान देते रहते हैं और स्वयं को बहुत गौरन्वान्वित महसूस करते हैं. इसके साथ ही जो आदमी इन चीजों को लेता हैं वह अपने को दबा महसूस करता हैं. कही न कही उसे सदैव ये बात खटकती रहती हैं कि जो सामान उसके पास हैं वह किसी का दिया हुआ हैं. बापू बाजार में जब कोई व्यक्ति २ - १० रु० में इन सामानों को खरीदेगा और उसका उपयोग करेगा तो उसके मन में कही से भी यह बात नहीं आएगी. वह गर्व से कहेगा कि मैंने इसे बापू बाजार से ख़रीदा हैं.

जौनपुर जनपद के महाविद्यालयों की एन एस एस इकाइयों के सहयोग से बापू बाजार में स्वयं सेवकों द्वारा कपड़ो के स्टाल लगाये गए थे. जिन पर उन लोगों ने खूब खरीदारी की जिन्हें वास्तव में कपड़ो कि जरूरत हैं.इस बाजार में बिकने वाले कपड़ो को एन एस एस के स्वयं सेवकों द्वारा लोगों से मांग कर जुटाया गया था. गरीबों का आत्म सम्मान भी बना रहे और उन्हें कपडे भी मिल जाये इसलिए इन कपड़ो को २-१० रुपए के प्रतीकात्मक मूल्य पर बेचा गया. लोगों में कपड़ा खरीदने कि होड़ लगी रही. एन एस एस समन्यवक डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह ने बापू बाजार के उद्देश्यों को बताया.बापू बाजार के उदघाटन के पूर्व दो मिनट का मौन रख कर महात्मा गाँधी को श्रधांजलि दी गई.

इस अवसर पर प्रो वी के सिंह,डॉ एच सी पुरोहित, आशुतोष सिंह, डॉ अजय वाघ, डॉ सुरजीत यादव,डॉ के एस तोमर समेत विभिन्न महाविद्यालयों के एन एस एस पदाधिकारी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे.

रिपोर्ट - दिग्विजय सिंह राठौर, प्राध्यापक , जनसंचार विभाग .