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पंचदश दीक्षांत समारोह-एक रिपोर्ट

पंचदश दीक्षांत समारोह-एक रिपोर्ट

वीर बहादुर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय का 15वां दीक्षांत समारोह मना

विद्यार्थी के चारित्रिक निर्माण में भी हो गुणवत्ताः बी0एल जोशी


जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं प्रदेश के राज्यपाल महामहिम बी0एल0 जोशी  ने कहा कि गुणवत्ता न सिंर्फ पठन पाठन तथा शोध में हो ,बल्कि विद्यार्थी के पूरे चारित्रिक निर्माण में दिखाई देना चाहिए। तभी समाज को इसका लाभ मिल सकता है। श्री जोशी शनिवार को विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर संगोष्ठी भवन में अध्यक्षीय संबोधन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमे यह समझना होगा कि अपनी जड़ों से कटकर कोई समाज प्रगतिशील नहीं हो सकता। ऐसे में शिक्षकों को वैज्ञानिक पद्धति  के अध्यापन के साथ विद्यार्थियों को संस्कृति ओर सभ्यता से भी साक्षात्कार कराएं। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में हमारे राष्ट्र के समक्ष ज्ञान आधारित समाज के स्थापना की चुनौती सबसे बड़ी है। ऐसे में विश्वविद्यालय के चिंतक ओर विचारक क्षेत्रीय आवश्यकताओं  के अनुरूप कुछ नवीन प्रयोग भी करें।उन्होने कहा कि समाज के निर्माण में युवाओं की इच्छाशक्ति का विशेष महत्व है। आप में जो सामथ्र्य है। वही आज के राष्ट्र की शक्ति और कल की आशा है,जब कभी समाज के सामने चुनौतियां आई है,युवको ने ही मेधा शक्ति ओर पुरूषार्थ से उसका सामना किया है और समस्याओं का समाधान ढूंढ़ा है।
महामहिम ने जिले की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां इतिहास के अनेक स्वर्णिम अध्याय लिखे गए। वैभव और पराभाव के दिनों में हमारे पुरखों ने रचना के लिए यत्नशील रहे। ऐसा जीवन जीने की कला गोमती और गंगा की कोख में जीवन के सत्य की खोज में लगे उन मनीषियों से मिली ,जिन्होंने अपनी साधना और आत्म ज्ञान से जीवन के सही स्वरूप को परखा, अपने जीवन में उतारा और जनमानस की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पौराणिक व्याख्यानों,शिलालेखो,घ्वंसावशेषों और अन्य साक्ष्यों से पता चलता है कि जौनपुर का अस्तित्व वैदिक काल से है। परम तपस्वी महर्षि यमदग्नि से लेकर महात्मा बुद्ध तक के चरण कमल जौनपुर की इस धरा पर पड़े है। शर्की के शासनकाल में शिक्षा ओर कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां जिले के ही नाम रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद निःसन्देह हम विकास की दिशा में बढे़ है। पूरा विश्व भारत को एक विकासशील आर्थिक शक्ति के रूप देखता हैं। इसका श्रेय प्रमुख रूप ये उन वैज्ञानिक ,इंजिनियरों ,चिकित्सिकों और अर्थशास्त्रियों को है। जो किसी न किसी विश्वविद्यालय अथवा संस्थान से शिक्षित प्रशिक्षित हुए है। इस दृष्टि से देखें तो हमारे विश्वविद्यालय राष्ट्र विकास का गोमुख है। उन्होंने  कहा कि बेहतर भविष्य के निर्माण का संकल्प लें ताकि हमारा राष्ट्र जीवंत, पुष्पित और पल्वित हो सके। उन्होंने कुलपति प्रो0संुदरलाल के बापूबाजार के समारोह की सराहना की।
मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् एवं पद्मश्री से अंलंकृत श्री चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि विद्यार्थी और युवाओं में ज्ञान और उर्जा  का अक्षय भंडार है।वे इसका सकारात्मक उपयोग देश और समाज के लिए करें । पर्यावरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने  कहा कि प्राकृतिक संसाधन जल,जंगल ओर जमीन का असतित्व संकट में है। इसके विनाशकारी परिणाम को रोकने के लिए हम सभी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि भू -विज्ञानी जिस हिमालय को विकासोन्मुखी  बता रहे हैं उसे हम क्षरणोन्मुख  पा रहे हैं। तो इसमें चिंता स्वाभाविक है। हिमालय देश का प्रहरी ही नहीं यह मौसम का नियंत्रक और जल स्तंभ है। देश की गंगा,यमुना ,सिंधु,ब्रम्हपुत्र तथा इनकी सैकड़ों हजारों सदानीरा सहायिकाएं हिमालय से ही जीवन ओर स्वरूप् ग्रहण करती हैं जिससे पूरे देश का जीवन संचालित होता है। इससे हिमालय में बिगाड़ का प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि गोमती नदी द्वारा घारा परिर्वतन के कारण कैथी गांव का भ्ूगोल ही बदल गया था। यहां बाढ़ से 2200 एकड़ भूमि लील गई । इस दौरान ख्रोना गांव के कई मकान नदी में समा गए। इसी तरह गाजीपुर,बलिया छपरा और सारण जिले के कई गांवों की बस्तियों को भी कोपभाजन बनना पड़ा। उन्होंने कुलपति ,आचार्यगणों,वैज्ञानिकों तथा विश्वविद्यालय परिवार से आग्रह किया कि प्रकृति के संरक्षण की चिंता में अपने कार्यों को सम्मिलित करते हुए इस दिशा में प्रगतिशील रहें।
पंचदश दीक्षांत समारोह के पावन पर्व पर कुलपति प्रो0सुंदरलाल ने महामहिम राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि आपके निर्देशन में विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा में व्यापक परिर्वतन हुआ है। आज के समारोह में आपकी उपस्थिति से हम सब आह्लादित एवं उत्साहित हैं। मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् चंडीप्रसाद भट्ट को उन्होंने सबके लिए प्रेरणास्रोत बताया । कहा कि उनका जीवन समाज के कमजोर वर्गो के लिए समर्पित रहा। ऐसे मनीषी को अपने बीच पाकर हम गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि विश्वद्यिालय में अनुशासन कायम रखने के लिए परिवार के कुछ सदस्यों पर कठिन कार्यवाही भी की गई । शोध मूल्यांकन में पारदर्शिता के लिए शोध प्रबंध मौखिकी की विडियोग्राफी कराई जा रही है। उन्होंने सभी विभागों की प्रगति का विस्तृत रूप् से विवरण दिया । इसमें जनसंचार विभाग में दस व्याख्यान,दो गोष्ठी दो परिचर्चाएं तथा तीन कार्यशालाओं का आयोजन हुआ। एप्लायड सायकाॅलाजी विभाग में तीन दिवसीय अन्र्तराष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया। इसी तरह बायोटेक्नाॅलाजी विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन और इंजिनियरिंग विभाग की ओर से कई कार्यक्रम कराए गए।वाइस चांसलर ने कहा कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय योजना के माध्यम से बापू बाजार की शुरूआत की है। इसमें लोगों के घर में इस्तेमाल न होने वाली सामान को हम दान में लेकर गांव की गरीब और जरूरतमंद लोगों कामूली टोकन मनी के साथ देते है।
इसके बाद कुलाधिपति,मुख्य अतिथि और कुलपति ने उच्च अंक पाए विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया । इसके बाद  कुलपति ने मुख्यअतिथि और कुलाधिपति को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया । इसके पूर्व हेलीपैड पर कुलाधिपति का स्वागत कुलसचिव बी0एल आर्य और प्रो0 डी0डी0 दूबे ने किया। इसके बाद कुलपति आवास पर राज्यपाल को गार्ड आॅफ आनर दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए चीफप्राक्टर डा0 अजय द्विवेदी के नेतृत्व में प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम डटी रही।
समारोह में शोभायात्रा के दौरान कुलाधिपति,कुलपति,कुलसचिव और संकाय प्रमुख और विभागाध्यक्ष मौजूद थे। समारोह में पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद,पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह,शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष काशीनाथ सिंह, डा.घनश्याम सिंह,डा.राजीव प्रकाश सिंह,डा.पंकज सिंह , शिक्षकसंघ के वर्तमान अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह, महामंत्री अनिल प्रताप सिंह, डा अजय प्रताप सिंह,डा.मानस पाण्डेय,डा. मनोज मिश्र,डॉ विजय तिवारी,डा.अवध बिहारी सिंह,दिग्विजय सिंह राठौर, आदि उपस्थित थे।
दिग्विजय सिंह राठौर