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कुलगीतवीर बहादुर सिंह विश्व-विद्यालय का हरितांचल। जय-जय-जय “पूरब की आत्मा”, जय-जय-जय “पूर्वाञ्चल”॥ पूर्व दिशा का ताज रहा है, “भारत का शीराज” रहा है, यह यमदग्नि-यजन की बेदी यह “कुतबन” का मादल। जय-जय-जय “पूरब की आत्मा”, जय-जय-जय “पूर्वांञ्चल”॥ दो धर्मों की मिलन-धुरी यह, राग सलोना “जौनपुरी” यह, संघर्षों की झंझर में झंकृत जिसके जीवन-पल। जय-जय-जय “पूरब की आत्मा”, जय-जय-जय “पूर्वांञ्चल”॥ नये सृजन की सजी आरती, उतरी वीणा लिये भारती, नव-जागरण-थाल में अर्पित यह पावन तुलसी दल। जय-जय-जय “पूरब की आत्मा”, जय-जय-जय “पूर्वांञ्चल”॥ कला-शिल्प-विज्ञान कलेवर, छलकाये प्रकाश के निर्झर, धेनुमति-तमसा-गंगा का यह पावन क्रीड़ास्थल। जय-जय-जय “पूरब की आत्मा”, जय-जय-जय “पूर्वांञ्चल”॥ नीति हमारी सरल-तरल हो, जिसमें जन का क्षेम-कुशल हो, गौतम-कपिल-कणाद-पतंञलि हों आदर्श अचंचल। जय-जय-जय “पूरब की आत्मा”, जय-जय-जय “पूर्वांञ्चल”॥ |
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Focusing on the quality of all the dimensions of higher education system the university aims at;
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Additional Objectives - We plan to
How we will do it
Examination and Evaluation Reforms: A Glimpse
Campus Development: On-Going Projects
Introduction of New Courses
ICT Upgradation
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Teaching Quality: Some Measures
Research Quality: Some Initiatives
Administrative Reforms
Campus Development: Proposed Projects
Other Plans
A Step Towards Innovation
Recent Achievements( Last One Year): Making Vision Happen...
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