18th Convocation-2015

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह का आयोजन शनिवार को संगोष्ठी भवन में हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि पूर्व महानिदेशक डीआरडीओ एवं नीति आयोग के सदस्य पद्म भूषण डा. वीके सारस्वत एवं अध्यक्षता कुलाधिपति एवं राज्यपाल राम नाईक ने की। दीक्षांत समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले कुल 51 विद्यार्थियों को स्वर्णपदक प्रदान किया गया।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पद्म भूषण डा. वीके सारस्वत ने कहा विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जो भी कार्य एवं शोध हो रहे है वह देश की संस्कृति और जीवन शैली को ध्यान में रखकर किया जाय तभी इसका लाभ भारतीयों को मिल पाएगा और यही महात्मा गांधी की भी सोच थी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आज हमारे देश की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है इसे पूरा करने के लिए हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे है। उन्होंने देश के लिए वर्तमान में अति आवश्यक रक्षा तकनीकी उत्पादन एवं संक्रियात्मक तथा ज्ञान आधारित तकनीकों एवं जैव तकनीकी, नैनो इलेक्ट्रानिक एवं नैनो जैव तकनीकी विषयों की आवश्यकताओं पर बल दिया। अपने सारगर्भित उद्बोधन में डा. सारस्वत ने एयरोस्पेस टेक्नोलाॅजी की चुनौतियों के बारे में भारत वर्ष के परिपेक्ष्य में चर्चा की। भारत के लिए विज्ञान और तकनीकी के प्रेरणास्रोत डा. सीवी रमन, डा. भटनागर, डा. भाभा, डा. विक्रम साराभाई के योगदानों की चर्चा की। स्वस्थ्य भारत के विकास के लिए उन्होंने उचित वातावरण एवं पर्यावरण की आवश्यकता पर बल दिया। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने स्पेस टेक्नोलाॅजी, पुर्नउपयोगी प्रक्षेपण यान, हाईपाॅवर प्लेन, अंतरिक्ष सोलर पाॅवर, अंतरिक्ष सुरक्षा एवं एयर ट्रांसपोर्टेशन जैसे तकनीकी पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, मानव रहित सूक्ष्म हवाई जहाजों इत्यादि की देश में उत्पादन किये जाने की चर्चा की। डा. सारस्वत ने अपने विद्वतापूर्ण उद्बोधन में विज्ञान एवं रक्षा क्षेत्र में भविष्य में प्रयोग होने वाली प्रौद्योगिकी का भी जिक्र किया जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी एवं कनवर्जन, मेम्स एवं नैनो टेक्नोलाॅजी, स्मार्ट मैटेरियल, नेटवर्क सेंटरिक वारफेयर आदि प्रमुख रही। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव नेटवर्किंग माॅडल का भी जिक्र किया जिसमें विश्वविद्यालय एवं उद्योगों के माॅडल तथा विश्वविद्यालय शोध एवं विकास संस्थाओं के नेटवर्किंग माॅडल के बारे में जानकारी दी।

अध्यक्षीय सम्बोधन में प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री राम नाईक ने कहा कि जो अपने अतीत को भूल जाता है वह समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता। हमें अपने पूर्वजों और इतिहास से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, इसका लाभ अमेरिका और इंग्लैण्ड जैसे विकसित देश उठा रहे है। जब भारतीय विदेशों में इलाज कराने के लिए जाता है तो वहां भी भारतीय चिकित्सक के रूप में मिलता है। ऐसे लोगों को हमारे देश में अभी बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विश्वविद्यालयों से हम बराबरी कैसे करें इस बात पर हमें चिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि 18वें दीक्षांत समारोह मनाने के बाद यह विश्वविद्यालय अब वयस्क हो गया है। यहां के विद्यार्थी खुले आसमान में जा रहे है, नई उड़ान की तैयारी है। अब उन्हें अपने कैरियर के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी। जीवन में सफल होने के लिए विद्यार्थियों को उन्होंने अपने सफलता के चार मंत्रों को बताया मुस्कुराते रहे, तारीफ करना सीखे, किसी की अवमानना न करे जो भी अच्छा करें उससे और अच्छा करने की आदत डालें। विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में उपाधिधारकों को दिये जाने वाले गणवेश के लिए उन्होंने बधाई दी। कुलाधिपति ने अपने उद्बोधन में महिला शक्ति को प्रमुखता देते हुए छात्रों से प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने की बात कही। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आपके शैक्षणिक जीवन का प्रारम्भिक सोपान है जिस पर चढ़कर आप अपने व्यक्तित्व को निरन्तर प्रखर बनायंेगे तथा संगठनों अथवा व्यवसायों में निष्ठा पूर्वक कार्यरत रहते हुऐ उन्नति की ओर अग्रसर होंगे। आपकी यह निष्ठा नये युग का निर्माण करने में सहायक होगी। आप सदैव जनहित एवं राष्ट्रहित में कार्य करेंगे, यह हम सभी की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय न केवल एक शैक्षणिक संस्थान है बल्कि बौद्धिक एंव चारित्रिक चेतना के निर्माण का एक केन्द्र भी है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयांे, कक्षाओं, योग्य शिक्षकों के मार्गदर्शन, उपयुक्त प्रशिक्षण एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों में उनकी तल्लीनता बहुॅमुखी विकास के रास्ते को प्रशस्त कर सकती है। स्वामी विवेकानन्द के वक्तव्य का उद्धरण किया। कहा कि ‘‘साहसी होकर काम करो। धीरज और स्थिरता से काम करना-यही एक मार्ग है। आगे बढ़ो और याद रखो धीरज, साहस, पवित्रता और अनवरत कर्म। जब तक तुम पवित्र होकर अपने उद्देश्य पर डटे रहोगे, तब तक तुम कभी निष्फल नहीं होवोगे। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।’’ यह वचन आज आपके लिए उपदेश है। इसे अपने जीवन में उतारो, मंजिल स्वयं प्राप्त होती चली जायेगी।

समारोह के अंत में मुख्य अतिथि को कुलाधिपति राम नाईक ने स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् प्रदान किया। कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कुलाधिपति को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् देकर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की। दीक्षांत समारोह के शोभा यात्रा की अगुवाई कुलसचिव डा. बीके पाण्डेय ने की। इस अवसर पर कार्य परिषद, विद्या परिषद के सदस्यगण पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, पूर्व कुलपति प्रो. कीर्ति सिंह, पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह, विधायक सीमा द्विवेदी वित्त अधिकारी अमरचंद्र, उपकुलसचिव संजय मल्ल, नारायण प्रसाद, पूर्व विधायक सुरेंद प्रताप सिंह, डा. अजय प्रताप सिंह, अशोक सिंह, डा. घनश्याम सिंह, डा. राजीव सिंह, डा. अनिल प्रताप सिंह, डा. एसपी ओझा, प्रो. डीडी दुबे, प्रो. बीबी तिवारी, प्रो. रामजी लाल, डा. एके श्रीवास्तव, डा. मानस पाण्डेय, डा. अविनाश पार्थडिकर, डा. संगीता साहू, डा. प्रदीप कुमार, संजीव गंगवार डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा आजमी, पंकज सिंह, सहित कई लोग मौजूद रहे।समारोह का संचालन एचसी पुरोहित ने किया।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर लाइव रहा दीक्षांत समारोह जौनपुर

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह को इस बार इंटरनेट के माध्यम से लाइव किया गया। लाइव कार्यक्रम का संचालन कंप्यूटर साइंस & इंजीनियरिंग/ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष संजीव गंगवार के निर्देशन में किया गया,जिसे विभिन्न हिस्सों में लोगों ने देखा।

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह का आयोजन शनिवार को संगोष्ठी भवन में हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि पूर्व महानिदेशक डीआरडीओ एवं नीति आयोग के सदस्य पद्म भूषण डा. वीके सारस्वत एवं अध्यक्षता कुलाधिपति एवं राज्यपाल राम नाईक ने की। दीक्षांत समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले कुल 51 विद्यार्थियों को स्वर्णपदक प्रदान किया गया।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पद्म भूषण डा. वीके सारस्वत ने कहा विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जो भी कार्य एवं शोध हो रहे है वह देश की संस्कृति और जीवन शैली को ध्यान में रखकर किया जाय तभी इसका लाभ भारतीयों को मिल पाएगा और यही महात्मा गांधी की भी सोच थी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आज हमारे देश की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है इसे पूरा करने के लिए हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे है। उन्होंने देश के लिए वर्तमान में अति आवश्यक रक्षा तकनीकी उत्पादन एवं संक्रियात्मक तथा ज्ञान आधारित तकनीकों एवं जैव तकनीकी, नैनो इलेक्ट्रानिक एवं नैनो जैव तकनीकी विषयों की आवश्यकताओं पर बल दिया। अपने सारगर्भित उद्बोधन में डा. सारस्वत ने एयरोस्पेस टेक्नोलाॅजी की चुनौतियों के बारे में भारत वर्ष के परिपेक्ष्य में चर्चा की। भारत के लिए विज्ञान और तकनीकी के प्रेरणास्रोत डा. सीवी रमन, डा. भटनागर, डा. भाभा, डा. विक्रम साराभाई के योगदानों की चर्चा की। स्वस्थ्य भारत के विकास के लिए उन्होंने उचित वातावरण एवं पर्यावरण की आवश्यकता पर बल दिया। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने स्पेस टेक्नोलाॅजी, पुर्नउपयोगी प्रक्षेपण यान, हाईपाॅवर प्लेन, अंतरिक्ष सोलर पाॅवर, अंतरिक्ष सुरक्षा एवं एयर ट्रांसपोर्टेशन जैसे तकनीकी पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, मानव रहित सूक्ष्म हवाई जहाजों इत्यादि की देश में उत्पादन किये जाने की चर्चा की। डा. सारस्वत ने अपने विद्वतापूर्ण उद्बोधन में विज्ञान एवं रक्षा क्षेत्र में भविष्य में प्रयोग होने वाली प्रौद्योगिकी का भी जिक्र किया जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी एवं कनवर्जन, मेम्स एवं नैनो टेक्नोलाॅजी, स्मार्ट मैटेरियल, नेटवर्क सेंटरिक वारफेयर आदि प्रमुख रही। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव नेटवर्किंग माॅडल का भी जिक्र किया जिसमें विश्वविद्यालय एवं उद्योगों के माॅडल तथा विश्वविद्यालय शोध एवं विकास संस्थाओं के नेटवर्किंग माॅडल के बारे में जानकारी दी।

अध्यक्षीय सम्बोधन में प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री राम नाईक ने कहा कि जो अपने अतीत को भूल जाता है वह समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता। हमें अपने पूर्वजों और इतिहास से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, इसका लाभ अमेरिका और इंग्लैण्ड जैसे विकसित देश उठा रहे है। जब भारतीय विदेशों में इलाज कराने के लिए जाता है तो वहां भी भारतीय चिकित्सक के रूप में मिलता है। ऐसे लोगों को हमारे देश में अभी बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विश्वविद्यालयों से हम बराबरी कैसे करें इस बात पर हमें चिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि 18वें दीक्षांत समारोह मनाने के बाद यह विश्वविद्यालय अब वयस्क हो गया है। यहां के विद्यार्थी खुले आसमान में जा रहे है, नई उड़ान की तैयारी है। अब उन्हें अपने कैरियर के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी। जीवन में सफल होने के लिए विद्यार्थियों को उन्होंने अपने सफलता के चार मंत्रों को बताया मुस्कुराते रहे, तारीफ करना सीखे, किसी की अवमानना न करे जो भी अच्छा करें उससे और अच्छा करने की आदत डालें। विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में उपाधिधारकों को दिये जाने वाले गणवेश के लिए उन्होंने बधाई दी। कुलाधिपति ने अपने उद्बोधन में महिला शक्ति को प्रमुखता देते हुए छात्रों से प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने की बात कही। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आपके शैक्षणिक जीवन का प्रारम्भिक सोपान है जिस पर चढ़कर आप अपने व्यक्तित्व को निरन्तर प्रखर बनायंेगे तथा संगठनों अथवा व्यवसायों में निष्ठा पूर्वक कार्यरत रहते हुऐ उन्नति की ओर अग्रसर होंगे। आपकी यह निष्ठा नये युग का निर्माण करने में सहायक होगी। आप सदैव जनहित एवं राष्ट्रहित में कार्य करेंगे, यह हम सभी की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय न केवल एक शैक्षणिक संस्थान है बल्कि बौद्धिक एंव चारित्रिक चेतना के निर्माण का एक केन्द्र भी है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयांे, कक्षाओं, योग्य शिक्षकों के मार्गदर्शन, उपयुक्त प्रशिक्षण एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों में उनकी तल्लीनता बहुॅमुखी विकास के रास्ते को प्रशस्त कर सकती है। स्वामी विवेकानन्द के वक्तव्य का उद्धरण किया। कहा कि ‘‘साहसी होकर काम करो। धीरज और स्थिरता से काम करना-यही एक मार्ग है। आगे बढ़ो और याद रखो धीरज, साहस, पवित्रता और अनवरत कर्म। जब तक तुम पवित्र होकर अपने उद्देश्य पर डटे रहोगे, तब तक तुम कभी निष्फल नहीं होवोगे। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।’’ यह वचन आज आपके लिए उपदेश है। इसे अपने जीवन में उतारो, मंजिल स्वयं प्राप्त होती चली जायेगी।

समारोह के अंत में मुख्य अतिथि को कुलाधिपति राम नाईक ने स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् प्रदान किया। कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कुलाधिपति को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् देकर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की। दीक्षांत समारोह के शोभा यात्रा की अगुवाई कुलसचिव डा. बीके पाण्डेय ने की। इस अवसर पर कार्य परिषद, विद्या परिषद के सदस्यगण पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, पूर्व कुलपति प्रो. कीर्ति सिंह, पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह, विधायक सीमा द्विवेदी वित्त अधिकारी अमरचंद्र, उपकुलसचिव संजय मल्ल, नारायण प्रसाद, पूर्व विधायक सुरेंद प्रताप सिंह, डा. अजय प्रताप सिंह, अशोक सिंह, डा. घनश्याम सिंह, डा. राजीव सिंह, डा. अनिल प्रताप सिंह, डा. एसपी ओझा, प्रो. डीडी दुबे, प्रो. बीबी तिवारी, प्रो. रामजी लाल, डा. एके श्रीवास्तव, डा. मानस पाण्डेय, डा. अविनाश पार्थडिकर, डा. संगीता साहू, डा. प्रदीप कुमार, संजीव गंगवार डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा आजमी, पंकज सिंह, सहित कई लोग मौजूद रहे।समारोह का संचालन एचसी पुरोहित ने किया।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर लाइव रहा दीक्षांत समारोह जौनपुर

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह को इस बार इंटरनेट के माध्यम से लाइव किया गया। लाइव कार्यक्रम का संचालन कंप्यूटर साइंस & इंजीनियरिंग/ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष संजीव गंगवार के निर्देशन में किया गया,जिसे विभिन्न हिस्सों में लोगों ने देखा।