विश वविद यालय ने याद किया डॉ क षेम को

विश वविद यालय ने याद किया डॉ क षेम को

“हे क षेम शब द दो” गाता हू …….
दो सितम बर को यशश वी कवि और लब ध प रतिष ठ साहित यकार स व.डॉ श रीपाल सिंह क षेम के जन मदिवस के अवसर पर विश वविद यालय नें अपनें क लगीत के इस महान रचनाकार के प रति सम मान प रदर शित करते ह उनके जन मदिवस को संस मरण दिवस के रूप में मनाया. इस अवसर पर जौनप र साहित य जगत से ज ड़े विद वान साहित यकारों नें जहा अपनी उपस थिति दर ज कराई वहीं स व.क षेम जी से ज ड़े अपनें संग रहणीय संस मरणों को ताज़ा भी किया.इस संस मरण दिवस पर तिलक धारी स नातकोत तर महाविद यालय के पूर व प राचार य डॉ बी.बी.सिंह,पूर व प राचार य डॉ अर ण सिंह ,सल तनत बहाद र पी.जी कालेज के पूर व प राचार य और हिन दी साहित य के प रतिष ठित समीक षक डॉ लाल साहब सिंह, ख यातिलब ध साहित यकार और विधिवेत ता डॉ.पी .सी. विश वकर मा”प रेम जौनप री”, प रख यात व यंगकार श री सभाजीत द विवेदी “प रखर”,साहित यकार वं कवि डॉ विनोद क मार सिंह,श री अरविन द क मार सिंह बेहोश,श री देवेन द र वर मा विमल तथा हाजी वकील अहमद अंसारी नें अपनें संस मरण वं स व.क षेम की रचना से उनके संस मरण दिवस पर अपनी भावपूर ण श रद धांजलि अर पित की.

जनसंचार विभाग की ओर से किये गये इस आयोजन में आये ह साहित यकारों और कविगण का स वागत विभागाध यक ष डॉ अजय प रताप सिंह द वारा और आभार प रदर शन अधिष ठाता छात र कल याण प रो.राम जी लाल द वारा किया गया.
संस मरण दिवस पर आदरणीय क लपति जी नें कहा कि –
हर व यक ति मन से कवि होता है वही भावना ं होती हैं-वही विचार होता है.सामान य जन भावना विचारों के भंवर में घूमता- ूमता रहता है,जीता मरता रहता है.उसे शब दों का टोटा होता है .साहित यकार ,कवि उन भावनाओं-विचारों को नौका बना लेता है और शब दों की पतवार से खेते ह दूर-सूदूर तक जा पह ंचता है,किनारे खड़े लोंगो को भिंगोता,स खाता है .
आदरणीय क लपति जी नें अपनी रचना के जरिये स व.डॉ क षेम को क छ इस तरह से श रद धा स मन अर पित किया—–


व यक त करूं मन की पीड़ा , या कहूं कही तन की अन भूति ,
स नू कहीं दंगल वैचारिक , स घूं या जन मन की प रीति ,
स वर की नैया खेने को जब, पतवार नहीं कहीं पाता हू ,
अक षर,मात रा खोजबीन , जब जोड़ ग णा बैठाता हू ,
स वर नौका के पतवारी शब द , श रीपाल क षेम में पाता हू ,
बार-बार दोहराता हू , कहते नहीं अघाता हू ,
हर बार उन हें ब लाता हू , ” हे क षेम शब द दो ” गाता हू …….

रिपोर ट – डॉ मनोज मिश र, जनसंचार विभाग

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